एक्सक्लूसिव

प्रोफेसर सुनीत कुमार सिंह को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद का अवार्ड

आशुतोष उपाध्याय
वाराणसी
प्रोफेसर सुनीत कुमार सिंह, एक जाने माने वाइरोलॉजिस्ट है और वर्तमान में चिकित्सा विज्ञानं संस्थान, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी के आणविक जीव विज्ञान बिभाग में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष के रूप में काम कर रहे हैं। प्रोफेसर सिंह को मेडिकल वायरलॉजी के क्षेत्र में अपने शोध कार्य के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के “जे बी श्रीवास्तव मेमोरियल ओरेशन अवार्ड” के लिये चुना गया है i

 

यह अवार्ड प्रोफेसर सिंह को माननीया राज्य  स्वास्थय एवं परिवार कल्याण मंत्री,भारत सरकार अनुप्रिया पटेल जी ने आईसीएमआर के द्वारा अक्टूबर ११, 2017 आयोजित कार्यक्रम में प्रदान किया I इस समारोह में में भारत सरकार की राज्य स्वास्थय एवं परिवार कल्याण मंत्री माननीया अनुप्रिया पटेल जी मुख्य अतिथि, डॉक्टर वी के पॉल सदस्य नीति आयोग, डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन, स्वस्थ्य महानिदेशक(आईसीएमआर),  एवं डॉक्टर के विजयराघवन, सचिव,जैवप्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार उपस्थित थे I

 

इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को प्रोफेसर सिंह को एचआईवी के रक्त से मस्तिष्क तक पहुंचने तक की क्रियाविधि को समझने के अपने शोध कार्य के लिए दिया गया है. एचआईवी मष्तिष्क में जाने के बाद न्यूरोएड्स को जन्म देता है। न्यूरोएड्स एक ऐसी स्थिति है, जब एचआईवी संक्रमित रोगियों के मस्तिष्क में HIV इन्फेक्शन के न्यूरोइफ्लमेटरी इवेंट्स के कारण विभिन्न न्यूरोलॉजिकल और न्यूरोकॉग्निटिव विकार पैदा होते हैं। डॉ। सिंह ने दिखाया कि एचआईवी “tat प्रोटीन” ब्लड ब्रेन बैरियर (बीबीबी) की अखंडता को प्रभावित करता है। बीबीबी मस्तिष्क में माइक्रोवास्कुलर एंडोथेलियल कोशिकाओं से बना होता है,ब्लड ब्रेन  बैरियर एक प्रकार का अवरोध हैं जो की मस्तिष्क से रक्त परिसंचरण को अलग करती है। इस प्रकार; किसी भी समय रक्त कोशिकाओं का मस्तिष्क तक प्रवेश काफी नियंत्रित रहता है।

 

डॉ। सिंह का शोध कार्य प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय जर्नल “जर्नल ऑफ न्यूरोसाइंस” में प्रकाशित किया गया है। अपने शोध कार्य में प्रोफेसर सिंह ने स्पष्ट रूप से दिखाया कि एचआईवी प्रोटीन मस्तिष्क की ब्लड ब्रेन बैरियर की अखंडता को प्रभावित करता हैं I प्रोफेसर सिंह ने अपने शोध कार्य में दिखाया हैं की किस प्रकार एचआईवी प्रोटीन मस्तिष्क की माइक्रोवास्कुलर एंडोथेलियल कोशिकाओं के आरएनए का कैसे इस्तेमाल ब्लड ब्रेन  बैरियर की अखंडता को प्रभावित करने के लिये करता है।

 

प्रोफेसर सिंह के शोध कार्य का असर विभिन्न मष्तिष्क केंद्रित वायरल संक्रमणों के दौरान ब्लड ब्रेन  बैरियर के विघटन की प्रक्रिया को समझने में एक महत्वपूर्ण सहायता करेगा । डॉ। सुनीत सिंह का अनुसंधान समूह वर्तमान में एचआईवी, जापानी एन्सेफलाइटिस वायरस और चिकनगुनिया विषाणु जैसे न्यूरोट्रोपिक वायरस के रोगजनन तंत्र को समझने में व्यस्त है। प्रोफेसर सिंह आणविक जीव विज्ञान बिभाग, इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज, BHU में एक आधुनिक आणविक वायरोलॉजी प्रयोगशाला की स्थापना की हैं।

 

 

प्रोफेसर सिंह ने बताया की भबिष्य में उनकी प्रयोगशाला दो चीज़ो पर अपना ध्यान केंद्रित करेगी, एक तो विषाणुओं की रोगज़नक़ छमता तथा दूसरा शरीर की कोशिकाओं की विषाणुरोधी प्रक्रियाओं का अध्ययन । प्रोफेसर सिंह ने इंटरनेशनल पब्लिशर्स के माध्यम से वायरल संक्रमण के विभिन्न पहलुओं पर कई पुस्तकें प्रकाशित की हैं। प्रोफेसर सुनीत सिंह ने विषाणु विज्ञानं के क्षेत्र में प्रशिक्षित जनशक्ति की आवश्यकता के बारे में जोर दिया। इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज, बी.एच.यू के निदेशक प्रोफेसर वी के शुक्ला, एवं संकाय अध्यक्ष प्रो जय प्रकाश, ने इस उपलब्धि के लिए प्रोफेसर सुनीत सिंह को बधाई दी है

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